Ranchi: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशव्यापी एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान की शुरुआत राजस्थान के अजमेर से की। इस अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में एक साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। झारखंड की राजधानी रांची के सदर अस्पताल में भी राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित था, जहां प्रधानमंत्री का संबोधन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा था।
इसी दौरान प्रधानमंत्री के भाषण में मुस्लिम लीग और कांग्रेस का उल्लेख होने पर मंच पर मौजूद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने आपत्ति जताई। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ऑडियो म्यूट करवा दिया और नाराजगी व्यक्त करते हुए मंच से बाहर चले गए।
इरफान अंसारी ने कहा कि यह महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने का स्वास्थ्य कार्यक्रम है, इसलिए इसमें राजनीतिक टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्यक्रम का उद्देश्य बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाना है तो इसमें कांग्रेस और मुस्लिम लीग का जिक्र क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मंच से राजनीति करना उचित नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि यदि ऐसी स्थिति रही तो झारखंड अपने संसाधनों से वैक्सीन खरीदेगा। उन्होंने कहा, “हम गाली सुनने के लिए मुफ्त टीका नहीं लेंगे, हमारी बेटियों का स्वास्थ्य सबसे पहले है।” साथ ही प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर राजनीतिक टिप्पणियों से परहेज किया जाए।
वहीं मंच पर मौजूद रक्षा राज्य मंत्री Sanjay Seth ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई यह कहता है कि झारखंड सरकार केंद्र से टीका नहीं लेगी और अपने पैसे से खरीदेगी, तो यह राजनीति से प्रेरित बयान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश की बेटियों और नागरिकों के स्वास्थ्य की चिंता कर रहे हैं और 14 वर्ष की बच्चियों को महंगी वैक्सीन मुफ्त दी जा रही है, ऐसे समय में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
संजय सेठ ने यह भी कहा कि कोरोना काल में भारत ने 118 देशों को वैक्सीन देकर वैश्विक स्तर पर सम्मान बढ़ाया। उन्होंने प्रधानमंत्री का भाषण म्यूट करने को लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री संबोधित कर रहे हों तो मंच से दूसरी गतिविधि शुरू करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी अन्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बोल रहे हों, तो क्या विपक्ष भी इसी तरह मंच छोड़ देगा?
स्वास्थ्य अभियान के बीच हुई इस सियासी नोकझोंक ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।