Ranchi: झारखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 के ‘अबुआ दिशोम बजट’ को लेकर सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां सत्ता पक्ष के विधायकों और ग्रामीण विकास मंत्री ने इस बजट को गांव, गरीब, महिला और युवाओं के समग्र विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने इसे निराशाजनक और दिशाहीन करार दिया है।
सत्ता पक्ष: “गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बजट”
ग्रामीण विकास मंत्री ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए विभागवार कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। उनके अनुसार यह बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि झारखंड को प्रगति और उन्नति की नई राह पर ले जाने वाला दूरदर्शी खाका है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता गांव, गरीब, महिला, युवा और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना है। ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका संवर्धन, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा और पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को गति देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मंत्री ने दावा किया कि यह बजट राज्य के समग्र और संतुलित विकास की दिशा तय करेगा।
विपक्ष: “राजस्व सृजन और युवाओं पर स्पष्ट रणनीति नहीं”
वहीं पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने बजट को वित्तीय प्रबंधन की सफलता का दस्तावेज मानने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें राजस्व सृजन की स्पष्ट रणनीति नहीं दिखती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास की ठोस दिशा तय करने में असफल रही है।
उनका कहना था कि युवाओं, छात्रों, बुजुर्गों और महिलाओं को इस बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन बेरोजगार युवकों के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आई। युवा सशक्तिकरण और रोजगार सृजन के मामले में बजट कमजोर साबित हुआ है।
सदन से सड़क तक बहस
अबुआ दिशोम बजट को लेकर सत्ता पक्ष जहां इसे समावेशी और ग्रामीण केंद्रित बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे अवसरों को गंवाने वाला बजट कह रहा है। आने वाले दिनों में इस बजट के प्रावधानों और उसके क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।