Ranchi: आज राख बुधवार (ऐश वेडनेसडे) के साथ ही पूरे विश्व के ईसाई समुदाय में चालीसा काल यानी लेंट की शुरुआत हो गई. यह 40 दिनों का पवित्र समय त्याग, तपस्या, प्रार्थना और आत्मचिंतन का काल माना जाता है. इसी अवधि के अंत में प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर बलिदान की स्मृति में गुड फ्राइडे मनाया जाता है.
राजधानी रांची के विभिन्न गिरजाघरों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना और प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं. संत मरिया महागिरजा घर में आर्चबिशप विंसेंट आईन्द ने श्रद्धालुओं के माथे पर राख लगाकर उन्हें आध्यात्मिक जीवन में संयम और समर्पण का संदेश दिया.
ईसाई मान्यता के अनुसार मनुष्य का शरीर मिट्टी से बना है और अंततः उसे मिट्टी में ही मिल जाना है. राख माथे पर लगाने की परंपरा इसी सत्य की याद दिलाती है कि जीवन क्षणभंगुर है और मनुष्य को ईश्वर के प्रति समर्पित रहना चाहिए. इसी कारण इस दिन को राख बुधवार या ऐश वेडनेसडे कहा जाता है.
आर्चबिशप विंसेंट आईन्द ने इस अवसर पर कहा कि प्रार्थना, त्याग, तपस्या या दान केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के और करीब आने के लिए होने चाहिए. लेंट का यह समय आत्मशुद्धि, पश्चाताप और आध्यात्मिक नवजीवन का अवसर है, जिसे ईसाई धर्मावलंबी पूरे श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाते हैं.