Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में प्रदूषण और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर जमकर बहस हुई। प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। औद्योगिक प्रदूषण, बीपीएल बच्चों के नामांकन में गड़बड़ी और गिरते शैक्षणिक स्तर को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे गए।
दामोदर नदी प्रदूषण पर सरकार से जवाब-तलब
विधायक सरयू राय ने दामोदर नदी में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नदी के जल की गुणवत्ता लगातार खराब हुई है। मंत्री ने जवाब में बताया कि जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। जांच में पाया गया कि प्रदूषण रोकने के लिए बनाई गई दीवार नियमों के अनुरूप कंक्रीट की नहीं थी। इस मामले में चंद्रपुरा ताप बिजली घर पर जुर्माना लगाया गया है। मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि जांच के दौरान सबूत मिटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन अब हर महीने मॉनिटरिंग की जा रही है।
बीपीएल बच्चों के नामांकन पर उठे सवाल
विधायक नीरा यादव और शशिभूषण कुशवाहा ने निजी स्कूलों में बीपीएल बच्चों के 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन में अनियमितता का आरोप लगाया। नीरा यादव ने कहा कि जब चयन प्रक्रिया लॉटरी पर आधारित है तो एक विशेष समुदाय के 75 प्रतिशत बच्चों का चयन कैसे हो रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी है और मैनेजमेंट की उपस्थिति में होती है। यदि किसी को शिकायत है तो वे सूचना के अधिकार के तहत जानकारी ले सकते हैं और सरकार कार्रवाई करेगी।
शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता
विधायक हेमलाल मुर्मू ने राज्य में शिक्षा के गिरते स्तर पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 100 में से केवल 38 बच्चे ही प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक नामांकित हो पा रहे हैं, जबकि 9वीं से 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते यह अनुपात घटकर 60.6 प्रतिशत रह जाता है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इन आंकड़ों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि 50 प्रतिशत से अधिक ड्रॉपआउट रेट भविष्य के लिए ठीक संकेत नहीं है।
इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार ने विभागीय आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि शिक्षा के स्तर में 2.5 से 4 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने प्रस्तुत आंकड़ों के स्रोत पर भी सवाल उठाए।
संथाल परगना और मिशन स्कूलों का मुद्दा
हेमलाल मुर्मू ने संथाल परगना क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के गरीब बच्चे मिशन स्कूलों में अधिक फीस देकर पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने मांग की कि सरकारी योजनाओं जैसे साइकिल और पोशाक का लाभ मिशन और अल्पसंख्यक स्कूलों के छात्रों को भी दिया जाए। मंत्री ने स्वीकार किया कि इन स्कूलों को सरकारी योजनाओं का सीमित लाभ मिलता है और सरकार इस दिशा में विचार करेगी।
बजट सत्र के पांचवें दिन की कार्यवाही ने यह साफ कर दिया कि प्रदूषण और शिक्षा जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में भी सदन में गूंजते रहेंगे।