Ranchi: झारखंड की बिजली आपूर्ति व्यवस्था संभालने वाली झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) एक बार फिर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। विभाग के कई इंजीनियर और अधिकारी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं, जिन पर करोड़ों रुपये के घोटाले और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों पर रिश्वत लेकर काम करने और टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि बिना अनुभव वाली नई फर्मों को भी करोड़ों रुपये के ठेके दे दिए गए, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वित्तीय गड़बड़ी और पद का दुरुपयोग
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ वरिष्ठ अभियंताओं ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को दरकिनार किया। सितंबर 2025 में बनी नई कंपनियों को भी बड़े प्रोजेक्ट सौंपे गए। इसके अलावा, करीब 5,000 करोड़ रुपये की बिजली शुल्क वसूली में भी अनियमितता के आरोप लगे हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं को ब्याज सहित राशि लौटाने की नौबत आ सकती है।
घोटाले का तरीका
इस पूरे मामले में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं:
बिलिंग में हेरफेर: बड़े उद्योगों के बिजली बिल कम करने के बदले मोटी रकम लेने के आरोप।
घटिया सामग्री की खरीद: ट्रांसफॉर्मर और तार जैसे उपकरणों की गुणवत्ता से समझौता।
कमीशन का खेल: ठेकेदारों के बिल पास कराने के बदले 2 से 3 प्रतिशत तक कमीशन लेने की बात सामने आई है।
फिलहाल, जांच एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे प्रकरण ने राज्य की बिजली व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।