Ranchi: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में यह बात सामने आई है कि कथित तौर पर घोटाले से अर्जित रकम को राज्य के बाहर भी निवेश किया गया।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उत्पाद विभाग में सचिव पद पर रहते हुए आईएएस मनोज कुमार पर आरोप है कि ओवर प्राइसिंग से होने वाली अवैध कमाई को पहले अपने करीबी रिश्तेदार के माध्यम से प्राप्त कराया गया। बाद में इस नेटवर्क में अलग-अलग जिलों में तैनात उत्पाद अधिकारियों की भी भूमिका सामने आई।
मामले में मैनपावर सप्लाई से जुड़ी कंपनी विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विस एंड कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी नीरज सिंह ने पुलिस रिमांड के दौरान कथित तौर पर बयान दिया है कि बतौर उत्पाद सचिव नियमित रूप से फिक्स रकम मिलने के बाद नोएडा में लगभग 4000 स्क्वायर फीट का एक फ्लैट खरीदा गया। इस फ्लैट की बाजार कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
यह बयान रांची स्थित ACB कोर्ट के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार सिंह के आदेश पर दर्ज रिमांड के दौरान सामने आया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि विभाग में बाद में पदस्थापित कुछ अधिकारियों ने धनबाद में बार संचालन और निजी कंपनियों में अपने करीबी रिश्तेदारों को साझेदार बनाने जैसे निवेश किए।
ACB की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे संभव हैं।