Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 13वें दिन सांसदों और विधायकों के प्रस्तावित आवास निर्माण के लिए आवंटित जमीन का मामला सदन में उठा। इस पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री Radhakrishna Kishore ने स्पष्ट किया कि आदिवासी जमीन पर जनप्रतिनिधियों के घर नहीं बनाए जाएंगे।
मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर राजस्व मंत्री, राजस्व सचिव और Manjunath Bhajantri (रांची उपायुक्त) से चर्चा की गई है। जांच में सामने आया कि कांके क्षेत्र में करीब 35 एकड़ जमीन का आवंटन वर्ष 2016 में किया गया था। यह जमीन स्वालंबी सहकारी समिति के संयुक्त सचिव के माध्यम से गृह निर्माण समिति को हस्तांतरित की गई थी।
उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल 2018 को गृह निर्माण समिति ने 1.70 करोड़ रुपये जमा किए थे और 1 जून 2018 को एकरारनामा भी पूरा हो गया था, जिसके बाद जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
मौजूदा स्थिति में 35 एकड़ जमीन में से करीब 3.30 एकड़ भूमि रिंग रोड में चली गई है, जबकि दो एकड़ जमीन पर आदिवासी मसना (श्मशान) है। इसके अलावा करीब तीन एकड़ जमीन में सात डोभा और तीन एकड़ में गड्ढा है। शेष लगभग 23.70 एकड़ जमीन पर स्थानीय ग्रामीण खेती कर रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि इस जमीन की बंदोबस्ती बंधना करमाली, चरकू करमाली और चरकू मुंडा समेत अन्य लोगों के नाम 1970-71 में की गई थी और तब से वे यहां खेती कर रहे हैं। हालांकि Raghubar Das के कार्यकाल में इनकी जमाबंदी रद्द कर दी गई थी।
संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार आदिवासी समुदाय की जमीन पर जनप्रतिनिधियों के आवास नहीं बनाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दो महीने के भीतर विवाद रहित नई जमीन चिन्हित कर गृह निर्माण समिति को आवंटित कर दी जाएगी।