नई दिल्ली: महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त है। कानूनी प्रावधानों और अदालतों के कई फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि छेड़छाड़ या दुष्कर्म के प्रयास जैसे अपराध समय बीतने से खत्म नहीं होते। अगर किसी महिला या लड़की के साथ वर्षों पहले भी ऐसी घटना हुई हो, तो आरोपी के खिलाफ बाद में भी मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है।
अदालतों का मानना है कि कई बार सामाजिक दबाव, बदनामी का डर या आरोपी की धमकी के कारण पीड़िता तुरंत शिकायत दर्ज नहीं करा पाती। इसलिए देरी से दर्ज की गई एफआईआर को केवल इसी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। यदि पीड़िता के बयान विश्वसनीय हों और पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों, तो घटना के 10 से 15 साल बाद भी आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।
कानून में ऐसे मामलों के लिए सख्त धाराएं तय की गई हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 के तहत महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग करना दंडनीय अपराध है। वहीं धारा 62 के तहत दुष्कर्म के प्रयास के मामले में भी कड़ी सजा का प्रावधान है, जिसमें दोषी को उम्रकैद तक की आधी सजा दी जा सकती है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ किए गए अपराधों में समय बीत जाने से आरोपी को राहत नहीं मिलती। ऐसे मामलों में न्याय दिलाने का अधिकार पीड़िता के पास हमेशा बना रहता है।