Ranchi: झारखंड के चर्चित गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। झारखंड हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए विकास तिवारी समेत सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 103 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा।
गवाहों के बयानों में विरोधाभास
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते। किसी ने हमलावरों की संख्या 2-3 बताई, तो किसी के बयान में घटनास्थल और घटनाक्रम को लेकर स्पष्ट अंतर था। कोर्ट ने माना कि इन विरोधाभासों के आधार पर दोष सिद्ध करना संभव नहीं है।
एक आरोपी घटना के समय जेल में था
खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया एक आरोपी घटना के समय किसी अन्य मामले में जेल में बंद था। अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि वह वारदात में शामिल था।
किन्हें मिली राहत
हाईकोर्ट ने विकास तिवारी, संतोष पांडे, विशाल कुमार सिंह, राहुल देव पांडे और दिलीप साव को राहत देते हुए कहा कि यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
दिनदहाड़े कोर्ट परिसर में AK-47 से हमला
जून 2015 में हजारीबाग कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान दिनदहाड़े AK-47 से हमला कर सुशील श्रीवास्तव, उनके सहयोगी कमाल खान और ग्यास खान की हत्या कर दी गई थी। इस घटना को झारखंड में अत्याधुनिक हथियारों के खुले इस्तेमाल की बड़ी वारदात माना गया था।
19 पुलिसकर्मी हुए थे निलंबित
घटना के बाद सुरक्षा में तैनात 19 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। सदर थाना में कांड संख्या 610/15 दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अब सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है।