Ranchi: राजधानी रांची में आज भारतीय पथ विक्रेता महासंघ की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें शहर के लगभग 50,000 पथ-विक्रेताओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया. महासंघ के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों से स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014 को रांची नगर निगम द्वारा प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया है.
प्रेस वार्ता में बताया गया कि अब तक पथ-विक्रेताओं का समुचित सर्वे नहीं कराया गया है. वर्ष 2016 में कराए गए सर्वे को भी सार्वजनिक नहीं किया गया। पात्र पथ-विक्रेताओं को अब तक Certificate of Vending (CoV) जारी नहीं किए गए हैं। इसके साथ ही वेंडिंग जोन अधिसूचित नहीं किए गए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत Town Vending Committee (TVC) का गठन भी नहीं किया गया है.
महासंघ का आरोप है कि कानूनी प्रावधानों को लागू किए बिना प्रशासन गरीब पथ-विक्रेताओं को “अतिक्रमणकारी” बताकर बेदखल कर रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून को लागू करना नगर निगम की जिम्मेदारी थी, तो उसकी विफलता का खामियाजा पथ-विक्रेता क्यों भुगतें? हजारों पात्र विक्रेताओं को CoV से वंचित क्यों रखा गया?
महासंघ ने आगामी नगर निकाय चुनाव के मद्देनज़र सभी मेयर प्रत्याशियों से सार्वजनिक रूप से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि उम्मीदवार यह बताएं कि यदि वे निर्वाचित होते हैं, तो क्या वे स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 को पूर्ण रूप से लागू करेंगे और पथ-विक्रेताओं की लंबित मांगों को पूरा करने में सहयोग करेंगे.
प्रेस वार्ता में महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो वे आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं.