रांची: झारखंड में अपराध का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब अपराधी वारदात को अंजाम देने के बाद छिपने के बजाय सोशल मीडिया पर खुलेआम उसकी जिम्मेदारी ले रहे हैं। इससे न केवल वे अपना दबदबा दिखा रहे हैं, बल्कि आम लोगों के बीच डर और दहशत का माहौल भी बना रहे हैं।
हाल के महीनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां अपराध के तुरंत बाद गिरोहों ने पोस्ट कर वारदात की जिम्मेदारी ली। 29 मार्च 2026 को रामगढ़ के पतरातु में फ्लाईओवर साइट पर हुई फायरिंग, 9 जनवरी को चतरा के राजधर साइडिंग के पास गोलीबारी, 6 जनवरी को कुजू में कोयला कारोबारी के घर फायरिंग—इन सभी घटनाओं में अलग-अलग गिरोहों ने खुद जिम्मेदारी ली। इसके अलावा दिसंबर 2025 में हजारीबाग के उरीमारी में हुई फायरिंग की घटनाओं में भी इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिला।
जानकारों के अनुसार, झारखंड में अपराध के इस ‘डिजिटल शो-ऑफ’ की शुरुआत कुख्यात अपराधी अमन साव (अब मृत) ने की थी। उसने सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ तस्वीरें पोस्ट कर और घटनाओं की जिम्मेदारी लेकर अपना खौफ कायम किया। अब उसी राह पर चलते हुए प्रिंस खान, राहुल दुबे और राहुल सिंह जैसे अपराधी भी वारदात के कुछ ही घंटों के भीतर पोस्ट डालकर अपना वर्चस्व दिखा रहे हैं।
अपराधियों का यह तरीका पुलिस के लिए एक ओर जहां जांच को आसान बना रहा है, वहीं दूसरी ओर यह एक बड़ी चुनौती भी बन गया है। अब अपराधी खुद अपनी पहचान उजागर कर देते हैं, जिससे पुलिस को उनके नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिलती है और कई मामलों में गिरफ्तारी भी तेज हुई है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर खुलेआम कानून को चुनौती देना आम जनता के बीच असुरक्षा की भावना को बढ़ा रहा है। हथियारों का प्रदर्शन और अपराध का प्रचार युवाओं को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे समाज में भय और अस्थिरता का माहौल बन रहा है।