Bokaro: बोकारो जिले में अफवाह के चलते भीड़ की हिंसा का एक गंभीर मामला सामने आया है। संभल (उत्तर प्रदेश) से आए पांच साधु बाबा बैद्यनाथधाम, देवघर की यात्रा पर थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने उन्हें बच्चा चोर समझकर पकड़ लिया और उनकी जमकर पिटाई कर दी।
सूचना मिलते ही झारखंड पुलिस मौके पर पहुंची और साधुओं को भीड़ से सुरक्षित निकालकर थाने ले गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में बच्चा चोरी से जुड़ा कोई भी सबूत नहीं मिला है। अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना पूरी तरह अफवाह और गलतफहमी का नतीजा थी।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल अफवाहें और बिना जांच-पड़ताल के फैलती बातें किस तरह कानून-व्यवस्था और निर्दोष लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही हैं।
पुलिस को और क्या कदम उठाने चाहिए?
संवेदनशील इलाकों में त्वरित सत्यापन टीम और रैपिड रिस्पॉन्स बढ़ाना
सोशल मीडिया/मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर फैल रही अफवाहों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग
भीड़ हिंसा पर सख्त कार्रवाई और उदाहरणात्मक सज़ा का संदेश
क्या समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है?
गांव-शहर में जन-जागरूकता अभियान (अफवाह पहचानो, पहले जांचो)
स्कूल, पंचायत और स्थानीय बैठकों में कानूनी परिणामों की जानकारी
“पहले पुलिस को सूचना दें, खुद कानून हाथ में न लें” जैसी मुहिम
अगर चाहें, मैं इसे और भी “न्यूज़-पोर्टल रेडी” फॉर्मेट में हेडिंग्स/सब-हेडिंग्स के साथ सेट कर दूँ।