Latehar: झारखंड का लातेहार जिला, जिसे कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब पूरी तरह उग्रवाद मुक्त होने की दहलीज पर खड़ा है. केंद्र सरकार ने देश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए 31 मार्च की डेडलाइन तय की है, लेकिन एसपी कुमार गौरव के नेतृत्व में लातेहार पुलिस इस लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है.
नक्सलियों के खिलाफ अंतिम अभियान शुरू
जिले में बचे-खुचे उग्रवादियों के खिलाफ पुलिस ने निर्णायक लड़ाई छेड़ दी है. एसपी कुमार गौरव ने साफ संदेश दिया है कि जो नक्सली समय रहते आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. पुलिस की इस आक्रामक रणनीति से उग्रवादी संगठनों में हड़कंप मचा हुआ है.
डेढ़ साल में टूटी नक्सलियों की कमर
पिछले डेढ़ वर्षों में चले लगातार नक्सल विरोधी अभियानों ने उग्रवादियों की रीढ़ तोड़ दी है. एक समय जिला मुख्यालय के आसपास तक नक्सलियों की मौजूदगी रहती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. पुलिस ने उनके सुरक्षित ठिकानों और ट्रेनिंग कैंपों को ध्वस्त कर दिया है. ग्रामीणों का वह सहयोग, जो पहले डर या विचारधारा के नाम पर मिलता था, अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. TSPC और PLFI जैसे संगठनों का जिले से पहले ही सफाया किया जा चुका है.
मई 2025 की मुठभेड़ बनी टर्निंग पॉइंट
नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ा मोड़ मई 2025 में आया, जब पुलिस ने मुठभेड़ में JJMP के दो कुख्यात नक्सलियों को ढेर कर दिया. इसके बाद एक बड़े माओवादी कमांडर को भी एनकाउंटर में मार गिराया गया. इन कार्रवाइयों के बाद उग्रवादियों में भगदड़ मच गई और 25 से अधिक नक्सलियों ने एक साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
अब भी रडार पर हैं 12–14 नक्सली
हालांकि अधिकांश संगठनों का सफाया हो चुका है, लेकिन माओवादी और JJMP के कुछ अवशेष अभी भी सक्रिय हैं. पुलिस अब इन बचे हुए करीब 12 से 14 नक्सलियों को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है. एसपी कुमार गौरव के मुताबिक, आने वाले कुछ दिन जिले के इतिहास के लिए बेहद निर्णायक होंगे.
पुलिस की इस तेज़ और सख्त कार्रवाई से उम्मीद है कि लातेहार बहुत जल्द झारखंड का पहला पूरी तरह नक्सल-मुक्त जिला बनने का गौरव हासिल करेगा.