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Pakud: गुटखा विवाद में कट्टा लहराया, अदालत ने सुनाई 7 साल की सजा
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Pakud: गुटखा विवाद में कट्टा लहराया, अदालत ने सुनाई 7 साल की सजा

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February 12, 2026 12 views 0 likes

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Pakud: पाकुड़ के इलामी गांव में गुटखा नहीं मिलने पर शुरू हुआ एक मामूली विवाद देखते ही देखते जानलेवा बन गया। इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी को अवैध हथियार रखने और जान से मारने की धमकी देने का दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई है.

मामूली बात पर भड़का था आरोपी
घटना 5 नवंबर 2020 की है. इलामी गांव निवासी इमादुरुल रहमान के बेटे अबुल कलाम आजाद अपनी किराना दुकान पर बैठे थे. तभी गांव का ही सलीम शेख दुकान पर पहुंचा और ‘विमल गुटखा’ मांगा. दुकान में गुटखा खत्म होने की बात सुनते ही वह बुरी तरह भड़क गया और अपनी जेब से देसी कट्टा निकाल लिया.

दुकान से घर तक पीछा कर दी धमकी
कट्टा देखते ही दुकान में अफरा-तफरी मच गई. आरोपी ने अबुल कलाम को जान से मारने की धमकी दी. डर के मारे अबुल कलाम दुकान से भागकर घर के आंगन में पहुंच गए, लेकिन आरोपी उनका पीछा करता हुआ वहां भी पहुंच गया और गाली-गलौज व धमकी देता रहा। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई.
परिवार और पड़ोसियों ने पकड़ा आरोपी
हालात बिगड़ते देख इमादुरुल रहमान और पड़ोसी जर्जिश शेख समेत अन्य लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए आरोपी को पकड़ लिया. तलाशी के दौरान उसके पास से एक लोडेड देसी कट्टा और लुंगी में छिपाकर रखा गया एक अतिरिक्त कारतूस बरामद हुआ. इसके बाद पुलिस को सूचना देकर आरोपी को सौंप दिया गया.

जांच के बाद अदालत में चला मामला
पाकुड़ मुफस्सिल थाना में मामला दर्ज हुआ. पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया. सत्र वाद संख्या 185/2022 के तहत जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडेय की अदालत में सुनवाई हुई. अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता लुकस कुमार हेमब्रम ने पक्ष रखा. गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया.

अदालत का सख्त फैसला
अदालत ने सलीम शेख को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1A) के तहत 7 साल के सश्रम कारावास और 8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर 6 महीने की अतिरिक्त कैद होगी. वहीं धारा 26(2) के तहत भी 7 साल की जेल और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर 3 महीने अतिरिक्त कैद काटनी होगी.

समाज के लिए कड़ा संदेश
इस फैसले से साफ संदेश गया है कि अवैध हथियार के दम पर डराने-धमकाने वालों को कानून बख्शेगा नहीं. साथ ही यह भी जरूरी है कि छोटे-छोटे विवादों को बातचीत और संयम से सुलझाया जाए, ताकि वे बड़े अपराध का रूप न लें.

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