Ranchi: झारखंड में 750 करोड़ रुपये से अधिक के कथित शराब घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल को पत्र लिखकर मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एजेंसी निष्पक्ष जांच करने के बजाय आरोपियों को बचाने का काम कर रही है।
पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2022 में राज्य की उत्पाद नीति में बदलाव कर एक सिंडिकेट को लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। शुरुआती जांच में घोटाले की राशि 38 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो अब बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि ACB ने दिखावे के लिए गिरफ्तारियां तो कीं, लेकिन जानबूझकर समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की। इसका फायदा उठाकर कई आरोपियों को अदालत से ‘डिफॉल्ट बेल’ मिल गई। मुख्य आरोपी रहे तत्कालीन उत्पाद सचिव आईएएस विनय कुमार चौबे समेत कई अन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों को इसी आधार पर जमानत मिलने का जिक्र पत्र में किया गया है।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के एक शराब कारोबारी की गिरफ्तारी के बाद फरार होने की घटना को भी ACB की लापरवाही का उदाहरण बताया गया है। आरोप है कि एजेंसी 90 दिनों की वैधानिक समय-सीमा के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने में विफल रही, जिससे अब तक गिरफ्तार 17 में से 14 आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से मांग की है कि ACB को तत्काल चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। उनका कहना है कि इससे ही राज्य में कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास बहाल हो सकेगा।