रांची: झारखंड के प्रशासनिक हलकों में मंगलवार को असाधारण हलचल देखी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 का आज अंतिम दिन होने के कारण सभी सरकारी विभागों में बजट राशि के अधिकतम उपयोग और लंबित बिलों के भुगतान की तेज़ दौड़ चल रही है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह दिन किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं माना जा रहा है।
सरकार ने इस वर्ष 1.45 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बजट पेश किया था, जिसमें ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना को प्राथमिकता दी गई। अब यह देखा जा रहा है कि इस बजट का कितना प्रभावी उपयोग हो पाया है।
क्यों अहम है आखिरी दिन
सरकारी नियमों के अनुसार, 31 मार्च की रात 12 बजे तक जो राशि खर्च नहीं होती या ट्रेजरी में सरेंडर नहीं की जाती, वह स्वतः समाप्त हो जाती है। यही वजह है कि राज्य की ट्रेजरी में ठेकेदारों के भुगतान और विकास योजनाओं के बिलों की भारी भीड़ लगी हुई है।
विशेषज्ञों की नजर में
आर्थिक जानकारों का मानना है कि किसी राज्य के लिए 85-90 प्रतिशत बजट खर्च कर लेना संतोषजनक उपलब्धि होती है। हालांकि, स्वास्थ्य और पेयजल जैसे विभागों में धीमी प्रगति के कारण कुछ राशि वापस (सरेंडर) होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार पहले ही अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.58 लाख करोड़ रुपये का बजट घोषित कर चुकी है, जिसकी सफलता काफी हद तक आज की फाइनेंशियल क्लोजिंग पर निर्भर करेगी।
प्रमुख क्षेत्रों में खर्च
ग्रामीण विकास: मनरेगा सहित योजनाओं में 3,190 करोड़ रुपये से अधिक खर्च, रोजगार सृजन पर जोर
शिक्षा-स्वास्थ्य: 18,000 करोड़ के बजट का बड़ा हिस्सा वेतन और बुनियादी ढांचे पर खर्च
महिला कल्याण: ‘मईंया सम्मान योजना’ में करीब 100% राशि लाभुकों तक पहुंची
विभागवार खर्च की स्थिति (संक्षेप में)
ऊर्जा, गृह, पथ निर्माण और महिला बाल विकास विभाग ने बेहतर खर्च प्रदर्शन दिखाया
कृषि, पशुपालन, श्रम, पेयजल और पंचायती राज विभागों में खर्च अपेक्षाकृत कम रहा
जल संसाधन और ग्रामीण कार्य विभाग लक्ष्य के करीब पहुंचे
बड़ी चुनौती क्या है?
सरकार ने इस साल पूंजीगत व्यय में 18% वृद्धि का लक्ष्य रखा था। ऐसे में अंतिम दिन तक खर्च की गति और गुणवत्ता दोनों पर नजर है।
31 मार्च का दिन सिर्फ औपचारिक क्लोजिंग नहीं, बल्कि यह तय करेगा कि सरकार की योजनाएं जमीन पर कितनी उतरीं। बजट का आंकड़ा बड़ा जरूर है, लेकिन असली कसौटी उसका प्रभावी क्रियान्वयन ही है।