Ranchi: झारखंड में प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने वाले आईएएस अधिकारियों की सुविधाओं और प्रोटोकॉल पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य में तैनात अधिकारियों के लिए बड़ी संख्या में सरकारी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिन पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल राज्य में कार्यरत करीब 177 आईएएस अधिकारियों के लिए 180 से 190 वाहन आवंटित हैं। इनमें जिलों में तैनात उपायुक्त (DC) और उप विकास आयुक्त (DDC) के फील्ड वाहन भी शामिल हैं। इन वाहनों के संचालन पर हर महीने करीब 1.2 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है।
वाहनों पर होने वाले खर्च का बड़ा हिस्सा ईंधन, ड्राइवर भत्ता और रखरखाव में जाता है। एक वाहन पर औसतन 50 हजार से 70 हजार रुपये मासिक खर्च होता है। सरकार की ओर से अधिकारियों को उनके पद के अनुसार 200 से 300 लीटर तक ईंधन कोटा भी निर्धारित किया गया है, जिस पर ही 20 से 30 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं।
अधिकारियों के लिए लग्जरी एसयूवी से लेकर मजबूत फील्ड व्हीकल तक की व्यवस्था की गई है। मुख्य सचिव को आमतौर पर 2 से 3 गाड़ियां मिलती हैं, जबकि अपर मुख्य सचिव और प्रधान सचिव स्तर के अधिकारियों को एक मुख्य वाहन के साथ अतिरिक्त सुविधा दी जाती है। वहीं, फील्ड में तैनात प्रमंडलीय आयुक्त और उपायुक्त के पास दो वाहन होते हैं, जबकि एसडीएम और एसडीओ को एक फील्ड वाहन उपलब्ध कराया जाता है।
हाल के वर्षों में सरकार ने नई गाड़ियां खरीदने के बजाय निजी एजेंसियों से वाहन किराये पर लेने की नीति भी अपनाई है। एक लग्जरी गाड़ी का मासिक किराया ड्राइवर सहित 40 से 60 हजार रुपये तक होता है।
इस बीच, खर्च कम करने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भी कदम बढ़ा रही है। इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2022 और उसके अपडेट के तहत अब कई वरिष्ठ अधिकारी ई-कार का उपयोग कर रहे हैं, जिससे परिचालन लागत में 60 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।