Ranchi: रांची के रिम्स की सरकारी जमीन को अवैध तरीके से बेचने और उस पर कब्जा करने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है. इस मामले में कई पूर्व अंचल अधिकारियों (सीओ), अंचल निरीक्षकों (सीआई) समेत अन्य पदाधिकारियों ने एसीबी मुख्यालय पहुंचकर जांच अधिकारी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया है. मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और जमीन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है.
जांच के घेरे में कई लोग
एसीबी ने रांची के भूमि सुधार उप-समाहर्ता (एलआरडीसी) कार्यालय के उन कर्मचारियों को भी नोटिस जारी किया है, जिनकी भूमिका संदिग्ध फाइलों को आगे बढ़ाने में सामने आई है. जांच एजेंसी की रडार पर केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े स्थानीय अमीन, राजस्व कर्मचारी और रजिस्ट्री दस्तावेजों में गवाह बनने वाले जमीन दलाल भी हैं. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी कागजात तैयार करने और जमीन की खरीद-बिक्री कराने में किन बिचौलियों की भूमिका रही.
1993 के बाद शुरू हुआ अवैध कब्जे का खेल
एसीबी की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि रिम्स की जमीन का अधिग्रहण काफी पहले ही हो चुका था और उससे जुड़े दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद थे. इसके बावजूद वर्ष 1993 के बाद से इस जमीन पर अवैध कब्जा और फर्जी रजिस्ट्री का खेल बड़े पैमाने पर शुरू हो गया. अब एसीबी इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान में जुटी है.