Bokaro: कभी अपनी चमक, रफ्तार और आधुनिक पहचान के लिए मशहूर बोकारो आज विकास की रफ्तार में पिछड़ता नजर आ रहा है। इसी चिंता ने शहर के प्रबुद्ध वर्ग, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और जनसरोकार से जुड़े लोगों को एक मंच पर आने के लिए प्रेरित किया।
कोऑपरेटिव कॉलोनी स्थित आरडब्ल्यूए में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में शहर के वर्तमान हालात से लेकर उसके गौरवशाली अतीत तक पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर विशेष मंथन किया गया कि आखिर बोकारो, जो कभी विकास के शिखर पर था, आज अपनी पहचान के लिए संघर्ष क्यों कर रहा है।
हालांकि चर्चा का मुख्य केंद्र केवल समस्याओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस बात पर ज्यादा जोर दिया गया कि किस तरह बोकारो की खोई हुई रौनक, जवानी और जीवंतता को वापस लाया जाए। शहर को फिर से विकास की मुख्यधारा में लाने और उसे एक बार फिर संभावनाओं का केंद्र बनाने के लिए ठोस रणनीति बनाने पर सहमति बनी।
बैठक में विभिन्न समुदायों, संस्थाओं और वर्गों से जुड़े लोगों ने अपने-अपने सुझाव रखे। समस्याओं के साथ-साथ उनके समाधान पर भी गंभीरता से विचार किया गया।
संयोजक मंडल का गठन
मिशन को प्रभावी और मजबूत बनाने के लिए सर्वसम्मति से पांच सदस्यीय संयोजक मंडल का गठन किया गया।
राकेश कुमार महतो (संयोजक)
सुरेश बुद्धिया
स्वामी सत्यकृष्ण महाराज
भूवन चंद्र दास
कृष्णा चौधरी
इस मौके पर सभी ने बोकारो के समग्र विकास का संकल्प लिया और मिशन को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।
आगे की राह
“मिशन बोकारो विकास” अब एक बड़े अभियान के रूप में आगे बढ़ चुका है। इसके तहत शहर के विकास, रोजगार, आधारभूत संरचना और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है।
मिशन से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि शहरवासी एकजुट होकर इस पहल से जुड़ते हैं, तो बोकारो एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकता है। अब इस अभियान को एक मजबूत कारवां बनने और सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने का इंतजार है।