Ranchi: हिरासत में हुई मौतों को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने शपथ पत्र दाखिल कर जानकारी दी कि वर्ष 2018 से अब तक राज्य की जेलों में 427 और पुलिस हिरासत में 39 लोगों की मौत हुई है।
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दांडेल द्वारा दाखिल शपथ पत्र में बताया गया कि जेल में हुई 427 मौतों में से केवल 202 मामलों में ही न्यायिक जांच कराई जा सकी है। वहीं, पुलिस हिरासत में हुई 39 मौतों में से 11 मामलों की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
इस पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 176(1-क) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 196 के तहत हिरासत में मौत, लापता होने या दुष्कर्म के हर मामले में मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य है।
अदालत ने जिन मामलों में अब तक जांच नहीं हुई है, उस पर याचिकाकर्ता से सुझाव मांगा है और पूछा है कि आगे वे क्या चाहते हैं तथा उनकी मांग क्या है। मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को निर्धारित की गई है।