रांची: झारखंड की राजधानी रांची में फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर होलिका दहन का पर्व पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। शहर के किशोरगंज चौक सहित विभिन्न मोहल्लों और चौक-चौराहों पर स्थानीय लोगों ने परंपरागत तरीके से होलिका की पूजा-अर्चना कर अग्नि प्रज्वलित की।
होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि असत्य और अत्याचार का अंत हुआ और भक्ति व सत्य की विजय हुई। इसी आस्था के साथ श्रद्धालुओं ने अग्नि की परिक्रमा की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस वर्ष रांची में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम के समय रहा। जैसे ही मुहूर्त प्रारंभ हुआ, लोगों ने मंत्रोच्चार और पारंपरिक गीतों के बीच होलिका में अग्नि प्रज्वलित की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह देखने को मिला।
होलिका दहन के साथ ही अब रंगों के पर्व होली का इंतजार है। 4 मार्च को शहरभर में रंग-गुलाल के साथ होली खेली जाएगी और फगुआ गीतों के बीच उल्लास का माहौल रहेगा।