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असम में JMM की एंट्री पर सियासत तेज: “वोट नहीं, टी-ट्राइब्स के हक की लड़ाई लड़ने पहुंचे”
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असम में JMM की एंट्री पर सियासत तेज: “वोट नहीं, टी-ट्राइब्स के हक की लड़ाई लड़ने पहुंचे”

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April 11, 2026 8 views 0 likes

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Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के महासचिव विनोद पांडेय ने असम विधानसभा चुनाव में पार्टी की भागीदारी को लेकर उठ रहे सवालों पर साफ और सख्त जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि जेएमएम का असम जाना किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने या वोट काटने के लिए नहीं, बल्कि वहां के टी-ट्राइब्स समुदाय के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए था।

पांडेय ने बताया कि असम के टी-ट्राइब्स संगठनों ने खुद पार्टी को आमंत्रित किया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विशेष तौर पर बुलावा भेजा गया, जिसके बाद जेएमएम ने वहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि झारखंड और असम के चाय श्रमिकों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, ऐसे में उनकी समस्याओं से पार्टी पहले से ही परिचित है।

चुनाव के दौरान लग रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जेएमएम किसी की मदद करने नहीं, बल्कि शोषित और वंचित टी-ट्राइब्स की आवाज बनने असम पहुंची है। उनके अधिकार, मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को उठाना ही पार्टी का मुख्य उद्देश्य है।

असम की 126 विधानसभा सीटों में से 16 पर उम्मीदवार उतारने वाली जेएमएम को कुछ सीटों पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। हालांकि पांडेय ने स्पष्ट किया कि चुनावी नतीजों से ज्यादा महत्वपूर्ण वहां के लोगों का भरोसा और समर्थन है।

उन्होंने यह भी कहा कि परिणाम चाहे जो हों, जेएमएम असम में अपनी राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई जारी रखेगी। पार्टी भविष्य में अपने संगठन का विस्तार करेगी और टी-ट्राइब्स समेत पिछड़े वर्गों को एक मजबूत विकल्प देने का काम करेगी।

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