Ranchi: आधुनिक अपराधों से निपटने और पुलिसिंग को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. गृह मंत्रालय के अधीन पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को पत्र लिखकर एक अहम एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत हर राज्य को अपनी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टास्क फोर्स बनानी होगी और कम से कम 70 प्रतिशत पुलिसकर्मियों को AI में प्रशिक्षित करना होगा.
रायपुर DGP कॉन्फ्रेंस के बाद लिया गया फैसला
यह निर्णय नवंबर 2025 में रायपुर में आयोजित DGP/IGO कॉन्फ्रेंस की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है. कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने कहा था कि क्राइम एनालिसिस, प्रेडिक्टिव पुलिसिंग और साइबर क्राइम की जांच के लिए पुलिस का तकनीकी रूप से सक्षम होना बेहद ज़रूरी है.
क्या होगी AI टास्क फोर्स की जिम्मेदारी?
एडवाइजरी के मुताबिक, राज्य स्तर पर एक वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में विशेष AI टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इस टास्क फोर्स की जिम्मेदारी होगी—
पुलिस बल के भीतर AI ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाना
पुलिसिंग में AI टूल्स के इस्तेमाल की निगरानी करना
AI को अपनाने की प्रगति पर नज़र रखना
समय-समय पर BPR&D को प्रगति रिपोर्ट भेजना
iGoT पोर्टल पर होगा 70% कर्मियों का प्रशिक्षण
पुलिसकर्मियों की डिजिटल और तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए सरकार iGoT (Integrated Government Online Training) पोर्टल का उपयोग कर रही है. राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि कम से कम 70 प्रतिशत पुलिसकर्मी पोर्टल पर उपलब्ध AI कोर्स पूरा करें, ताकि पुलिस बल भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रह सके.